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Monthly Archives: जनवरी 2011
काया
अद्भुत,अनुपम,निराली है यौवन की ये काया नदिया की चंचलता पुष्प की है कोमलता ये रूप देख दुश्यंत को और कुछ ना भाया कोमल, कामुक, मदभरा है उसका हर अंग नयन झुका के हलका सा मुस्करा के छेड दी दुश्यंत के … Continue reading
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